एक तरफ भाजपा का विरोध दूसरी तरफ महेंद्रनाथ पांडे का निर्दोष चेहरा
कल तक जो क्षत्रिय समाज भारतीय जनता पार्टी के लिये पूर्णरूप से समर्पित था आज दूर हो रहा है,पिछले हफ्ते गुजरात के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में अचानक बीजेपी के खिलाफ राजपूतों के कुछ संगठनों ने मोर्चा संभाल लिया। यह बड़ा ही अचंभित करने वाला था। क्योंकि उत्तर प्रदेश में एक समय ठाकुर भारतीय जनता पार्टी के कट्टर समर्थक थे। पूर्वांचल के राजनीतिक गलियारों में यहां तक कहा जाता है कि गैर-बीजेपी दल का ठाकुर या राजपूत नेता केवल शरीर से ही उस पार्टी में है। लेकिन उसकी आत्मा बीजेपी में होती है। जाहिर है कि जब ऐसी बातें हो रही हों तो ठाकुर समाज की भाजपा से असंतोष की बात पर भला कौन यकीन करेगा? पर ये गॉसिप नहीं है हकीकत है। पर सवाल यह है कि ठाकुर समाज का यह असंतोष किस लेवल का है और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।
चंदौली की बात करे तो महेंद्रनाथ पांडे एक साफ सुथरी छवि के नेता है,जिनका अपराध और अपराधियों की दुनिया से कुछ लेना देना नही है,जरूरत पड़ने पर सत्य के साथ खड़े दिखते है वही चंदौली के कुछ ऐसे नेता भी है जो केवल गलत और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगो की खुलेआम पैरवी करते है,इस कसमकस मे क्या किया जाय एक तरफ भाजपा का विरोध है तो दूसरी तरफ महेंद्रनाथ पांडे का निर्दोष चेहरा है,
चंदौली की बात करे तो महेंद्रनाथ पांडे एक साफ सुथरी छवि के नेता है,जिनका अपराध और अपराधियों की दुनिया से कुछ लेना देना नही है,जरूरत पड़ने पर सत्य के साथ खड़े दिखते है वही चंदौली के कुछ ऐसे नेता भी है जो केवल गलत और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगो की खुलेआम पैरवी करते है,इस कसमकस मे क्या किया जाय एक तरफ भाजपा का विरोध है तो दूसरी तरफ महेंद्रनाथ पांडे का निर्दोष चेहरा है,
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