आज के दिन ही जन्म लिये,आज ही के दिन शहीद हुए चंदौली के लाल धीरज सिंह

अमर शहीद शौर्य चक्र विजेता धीरज सिंह की अमर कहानी
धानापुर के हिंगुतरगढ निवासी मधुकर सिंह व सरोज सिंह की कोख से धीरज सिंह का जन्म 3 मई 1984 को हुआ था। इनका बचपन बहुत ही सादगी पूर्ण रहा इनकी प्रारंभिक शिक्षा जूनियर हाई स्कूल हिंगुतरगढ़ से एवं बारहवीं तक की शिक्षा अमर वीर इंटर कालेज धानापुर से हुई। शहीद धीरज सिंह का खेल के प्रति काफी जुड़ाव था। वे फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे। वर्ष 2002 में BRO वाराणसी से उनका चयन भारतीय सेना के आर्ड कोर में एक सिपाही के रूप में हुआ। प्रारंभिक ट्रेनिंग पूरी करनके वे 24 राष्ट्रीय राइफल की टुकड़ी से जुड़े जो उस समय अनंतनाग जनपद के समीप थी।

24 राष्ट्रीय राइफल के कामांडिग ऑफिसर को इंटेलिजेंट ब्यूरो से अनंतनाग जिले के कंगन गांव में आतंकवादियों के छिपे होने की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुयी। जिसपर उन आतंकवादियों को जहन्नुम भेजने की जिम्मेदारी 24 राष्ट्रीय राइफल के कमांडिंग ऑफिसर को मिली। उन टीम केइंटेलिजेंट ब्यूरो से अनंतनाग जिले के कंगन गांव में आतंकवादियों के छिपे होने की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुयी। जिसपर उन आतंकवादियों को जहन्नुम भेजने की जिम्मेदारी 24 राष्ट्रीय राइफल के कमांडिंग ऑफिसर को मिली। उनके टीम के कमांडिंग ऑफिसर अपने बहादुर सैनिकों के साथ सर्च ऑपरेशन के लिए निकल पड़े। सी टीम में धीरज सिंह भी थे। कंगन गांव को चारों तरफ से घेर लिया गया और सर्च ऑपरेशन जारी था इसकी सूचना जैसे ही छिपे आतंकवादियों को मिली वो भागने की फिराक में इधर उधर भागने लगे।

भागने में असफल हुए आतंकवादियों ने एक रिहायसी मकान में रह रहे नागरिकों को बन्धक बनाते हुए ढाल बनाने की कोशिश किये। आपरेशन को सफलता अंजाम तक पहुंचाने में वीर सैनिक धीरज सिंह 3 मई 2006 को मां भारती के लिए समर्पित हो गये। शहीद धीरज सिंह को राष्ट्रपति महोदय द्वारा (मरणोपरांत) शौर्य चक्र से नवाजा गया।

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