पुरातन छात्र की नजर मे हीरा सिंह राजकीय महाविद्यालय के शिक्षा का गिरता स्तर

धानापुर शहीद हीरा सिंह राजकीय महाविद्यालय मे उच्च शिक्षा का गिरते स्तर को देखने के लिये आज जैसे ही बीस वर्षों बाद मै महाविद्यालय मे पहुंचा बहुत ही अचंभित हुआ , महाविद्यालय की बिल्डिंग वही थी बस कब्जा नई पीढी का था , सोशल मीडिया की पैदाईश छात्रों का जीवन अंधकार मे गुजरेगा उनका भविष्य साफ नजर आ रहा था , कुछ शिक्षक थे जो लड़कियों को नाचने के लिये बुला रहे थे कुछ लड़कियां थी जो नाच रही थी फिल्मी गानों पर, कुछ मेहमान थे जो तालिया बजा रहे थे ,
अचानक एक सर ने जिनको बोलने का भी शहूर नहीं था एक पत्रकार को संपादक बोलते हुए सम्मानित कर दिया 
जैसे जगजीत सिंह की गजल चल रही हो सबने कहा ये चांद है मैने कहा चेहरा तेरा, मूर्खो और अनपढ़ो को सम्मान पाता देख मुझे दुख हुआ शहीद हीरा सिंह को भी होता होगा,जब कोई आकर बोलता है इस देश की मिट्टी मे मेरा भी खून है,
हम जयराम सिंह, शिवशंकर यादव , वासिद अली, आरके सिंह के जमाने के थे हमे दुख होना लाजमी था हमारे जमाने मे कुर्सियां टूटी थी आज नई है, पंखे बिगड़े थे आज नए है, लड़कियां सिमटी थी लड़के अनुशासनहीन थे आज सब अच्छे थे बस फर्क था तो केवल ज्ञान का मुख्य अतिथि पृथ्वीश नाग के आलावा कुछ भी सुनने लायक नहीं था,
किसी शिक्षक की बातों मे कुछ भारीपन दर्शन नजर नहीं आया, 
ये पीढी क्या पायेगी न ज्ञान न शिक्षा केवल डिग्री 
बहुत दुख हुआ अपने बच्चों को इस महाविद्यालय से दूर रखे बर्बादी तय है।


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