पसली मे फंसी गोली और ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप यही पहचान है गोपाल सिंह की

फोटो साभार Ai 
खबर अखबारों मे छपती है मोदी जी दिल की बात करते है और हम भी।
धानापुर गैंगस्टर हत्याकांड मे नामजद आरोपी गोपाल सिंह की कहानी मेरी जुबानी

 लगभग पंद्रह साल पहले पंद्रह साल की उम्र मे वो नौजवान गांव का बीडीसी बनना चाहता था, लेकिन उसको बॉक्सिंग का बड़ा शौक था घर मे बोरि मे बालू बांधकर बॉक्सिंग करता था इसलिए गांव के लोग उसे बॉक्सर कहते थे किसी को भी दो मुक्के मे जमीन पर गिरा देता था उमर कम वजन कम लम्बाई कम लेकिन इरादे आसमान पर थे, अपनी मजबूत बाजुओं की ताकत को भाप नहीं पाया, रायपुर के एक धोबी से नाई की दुकान मे झगड़ा हुआ, झगड़ा मामूली था लेकिन धोबी ने आग लगा दी और दो लोगो को इस आग मे धकेल कर अपने साइड हो लिया अंजाम बहुत बुरा हुआ दो परिवार इस झगड़े की भेट चढ़ गए।
गोपाल और उसके भाई को बीच बाजार में सटा कर गोली मारी गई, गोपाल के भाई राजन की तुरंत मौत हो गई गोपाल को पसली मे गोली फंस गई (शायद आज तक फंसी है) ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा, किसी तरह उसकी जान बची आज अपनी सारी जमीन जायदाद को बेचकर पता नहीं कहा है, आज एक हत्या हुई और सारा इल्जाम उसपर आ गया, मीडिया से लेकर पुलिस तक उसको खोज रही है। लेकिन असली बात को लोग दरकिनार कर रहे है,
इसको खबर न समझे ये मन की बात है 

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